धारावाहिक रामायण ने जहां टीवी सीरियल के इतिहास में अमिट जगह बनाई, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि रामायण सीरियल बनने के दौरान इसके निर्माता रामानंद सागर ने एक्टरों से क्या-क्या पापड़ नहीं बिलवाये। रामायण में मंदोदरी का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री ने इस धारावाहिक से जुड़े ऐसे राज खोले हैं जिन्हें सुनकर आपका चौंकना स्वाभाविक है।
बहुचर्चित सीरियल रामायण में मंदोदरी की भूमिका निभाने वाली राजयोगिनी बीके प्रभा मिश्रा का कहना है कि इस सीरियल में मिले किरदार से उन्हें खासी पहचान मिली। मंदोदरी की भूमिका ने उनके जीवन को अध्यात्म का रास्ता दिखाया। राजयोग के जरिए वे ग्लैमरस लाइफ से दूर होकर पूरी तरह आध्यात्मिक बन गईं।
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा शुभ विहार स्थित केंद्र में चल रहे 5 दिनी चिंतन शिविर में मुख्य वक्ता बनकर पहुंचीं बीके प्रभा मिश्रा ने कहा कि अभिनय के प्रति उनका रुझान बचपन से ही था। इप्टा ने उन्हें मंच दिया। 17 साल की उम्र से ही उन्होंने इस क्षेत्र में कॅरियर बनाना शुरू किया। इस बीच उन्होंने कई फिल्मों के अलावा टीवी सीरियल में कई किरदार निभाए। हिंदी फीचर फिल्म 'प्यार हुआ धीरे-धीरे' के साथ ही प्रतिबंध, आह आदि टीवी सीरियल की वे डायरेक्टर भी रहीं और इनमें किरदार भी निभाए। इसी बीच उन्हें रामानंद सागर के टीवी सीरियल रामायण में मंदोदरी के रोल का ऑफर मिला। इस किरदार ने उन्हें देश ही नहीं, विश्वभर में नाम दिया। इस सीरियल उन्हें खास पहचान मिली, तो दूसरी ओर उनके जीवन का रुख अध्यात्म की ओर मुड़ गया।
बीके प्रभा ने रामायण से जुड़ा एक रहस्य साझा करते हुए बताया कि रामानंद सागर ने सीरियल शुरू करने से पहले ही सभी कलाकारों से सात्विक खान-पान, रहन-सहन का एग्रीमेंट किया था।
सीरियल पूरे चार सालों में बना और कलाकारों को इस बीच नॉनवेज, स्मोकिंग, ड्रिंकिंग या अन्य दुव्र्यसनों से दूर रहना पड़ा
जो एक्टर इनके आदी थे, उन्हें रामानंद सागर के इस नियम से खीज होती थी। चार साल बाद वही एक्टर पूरी तरह सात्विक बनकर निकले और आज भी उन्हीं नियमों पर चल रहे हैं।
बीके प्रभा ने बताया कि रामायण के निर्माता-निर्देशक रामानंद सागर ने सीरियल को जीवंत बनाने के लिए मुख्य पात्रों के लिए जाति के अनुरूप किरदार तय किए थे।
अरुण गोविल क्षत्रिय थे तो उन्हें राम बनाया गया। रावण ब्राह्मण कुल से थे, इसलिए इसके लिए अरविंद त्रिवेदी को चुना।
वे भी ब्राह्मण हैं, इसलिए उन्हें मंदोदरी का किरदार मिला। किरदार के लिए जाति का सामंजस्य इसलिए बिठाया गया कि किरदार उसमें पूरी तरह रम जाएं। ऐसा हुआ भी.
यही वजह है कि 18 साल बाद भी यह सीरियल दर्शक उतनी ही आस्था से देखते हैं।
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